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Home/झारखण्ड/चाईबासा: नहीं शुद्ध पेयजल, नहीं सड़क, नहीं नियमित बिजली; विकास के दावों पर ग्रामीणों का बड़ा सवाल
झारखण्डपश्चिमी सिंहभूम

चाईबासा: नहीं शुद्ध पेयजल, नहीं सड़क, नहीं नियमित बिजली; विकास के दावों पर ग्रामीणों का बड़ा सवाल

By joharjharkhandliveinfo@gmail.com
August 3, 2026

Chaibasa: एशिया के सबसे बड़े साल वृक्षों के जंगल सारंडा की राजधानी कहे जाने वाले थोलकोबाद गांव की तस्वीर विकास के सरकारी दावों की हकीकत बयां करती है. जिस गांव को कभी अंग्रेजों ने अपनी मौज-मस्ती और जंगल की खूबसूरती का आनंद लेने के लिए चुना था, जहां ऐतिहासिक वन विश्रामगृह बनाया गया था और जहां आज भी देशभर से आईएफएस प्रशिक्षु, पर्यटक तथा अधिकारी पहुंचते हैं, उसी गांव के आदिवासी ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी उनकी सबसे बड़ी जरूरत पानी, सड़क और बिजली ही बनी हुई है. थोलकोबाद के ग्रामीण बिमल होनहागा, गुमिदा होनहागा समेत कई महिलाओं और ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. गांव के लोग आज भी पास के एक प्राकृतिक नाले में चुआ (प्राकृतिक जलस्रोत) बनाकर वहीं से पानी पीने के लिए लाते हैं. यही पानी पीने के अलावा नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने में भी इस्तेमाल किया जाता है. बरसात के मौसम में यही पानी दूषित हो जाता है, जिससे ग्रामीणों में बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है. इसी नाले का पानी का इस्तेमाल ग्रामीण तमाम कार्य के लिए करते है.

Contents
  • एक जलमीनार, वह भी सिर्फ स्कूल के लिए
  • 2016 के बाद नहीं हुआ कोई विकास कार्य
  • बिजली भी बनी बड़ी समस्या
  • अंग्रेजों का ऐतिहासिक विश्रामगृह, आज भी आकर्षण का केंद्र
  • पर्यटन की अपार संभावनाएं, लेकिन सड़कें बदहाल
  • सड़क सुधरे तो बदलेगी ग्रामीणों की तकदीर
  • ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

एक जलमीनार, वह भी सिर्फ स्कूल के लिए

ग्रामीणों के अनुसार गांव में केवल एक सोलर चालित जलमीनार लगाया गया है, जो स्कूल परिसर के पास है और मुख्य रूप से स्कूली बच्चों के उपयोग के लिए है. गांव के अन्य टोले आज भी पेयजल सुविधा से पूरी तरह वंचित हैं. ग्रामीणों की मांग है कि कम से कम तीन स्थानों पर सोलर आधारित जलमीनार स्थापित की जाए, ताकि सभी टोले के लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सके. ग्रामीणों ने बताया कि मुख्य सड़क से गांव को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग आज भी कच्चा है. बारिश शुरू होते ही यह सड़क कीचड़ और दलदल में बदल जाती है, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है. बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है.

2016 के बाद नहीं हुआ कोई विकास कार्य

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2016 के बाद पंचायत अथवा किसी अन्य विभाग की ओर से गांव में कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं कराया गया. न सड़क बनी, न पेयजल की व्यवस्था हुई और न ही अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया.

बिजली भी बनी बड़ी समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नियमित बिजली आपूर्ति नहीं होने से लोगों को रोजमर्रा के कार्यों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने गांव में स्थायी और निर्बाध बिजली व्यवस्था की मांग की.

अंग्रेजों का ऐतिहासिक विश्रामगृह, आज भी आकर्षण का केंद्र

थोलकोबाद का ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है. अंग्रेजों ने यहां जंगल के बीच एक भव्य वन विश्रामगृह का निर्माण कराया था, जहां वे विश्राम और शिकार के लिए आया करते थे. वर्ष 2005 में नक्सलियों ने इस ऐतिहासिक भवन को विस्फोट कर ध्वस्त कर दिया था. बाद में सारंडा वन प्रमंडल ने उसी स्थान पर नया वन विश्रामगृह बनाया. आज यहां देश के विभिन्न राज्यों से प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी प्रशिक्षण के दौरान पहुंचते हैं. इसके अलावा अनेक पर्यटक भी परिवार के साथ यहां प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने आते हैं..

पर्यटन की अपार संभावनाएं, लेकिन सड़कें बदहाल

थोलकोबाद तक राउरकेला, मनोहरपुर, किरीबुरू, मेघाहातुबुरु और छोटानागरा से अलग-अलग सड़कें जाती हैं, लेकिन लगभग सभी सड़कें जर्जर हो चुकी हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं और आज गड्ढों में तब्दील हैं. हालत यह है कि छोटी कारों का यहां तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है.

सड़क सुधरे तो बदलेगी ग्रामीणों की तकदीर

ग्रामीणों का मानना है कि यदि थोलकोबाद तक अच्छी सड़क बन जाए तो यहां हजारों पर्यटक पहुंच सकते हैं. सारंडा के घने जंगल, झरने, वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं. इससे स्थानीय युवाओं को गाइड, होम-स्टे, होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य व्यवसायों में रोजगार मिलेगा तथा गांव की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी.

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि थोलकोबाद में तत्काल तीन सोलर जलमीनार स्थापित किए जाएं, गांव की गलियों में पीसीसी सड़क बनाई जाए, मुख्य संपर्क मार्ग का पक्कीकरण कराया जाए तथा नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

AlsoRead:चक्रधरपुर: स्कूल की जमीन पर अंतिम संस्कार को लेकर विवाद, ग्राम सभा में जमीन मापी और सीमांकन कराने की मांग

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