टाटा समूह में LIC का निवेश बढ़ा, पोर्टफोलियो वैल्यू 1 लाख करोड़ रुपये के पार; 10 कंपनियों में बढ़ी हिस्सेदारी
नई दिल्ली। टाटा समूह से जुड़े कॉरपोरेट गवर्नेंस और नेतृत्व के मुद्दों के बीच समूह की सूचीबद्ध कंपनियों में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों में LIC के निवेश का कुल मूल्य अब 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि जून 2022 के बाद टाटा समूह की 14 सूचीबद्ध कंपनियों में से 10 में LIC की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह अवधि एन. चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन के रूप में दूसरे कार्यकाल से भी जुड़ी हुई है।
किन कंपनियों में बढ़ी LIC की हिस्सेदारी?
LIC लंबे समय से टाटा समूह की कई कंपनियों में एक प्रमुख संस्थागत निवेशक रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जून 2022 के बाद समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों में LIC ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। इससे टाटा समूह की कंपनियों में LIC के शेयरों का कुल बाजार मूल्य भी बढ़ा है।
LIC के निवेश में बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब टाटा संस के नेतृत्व, होल्डिंग कंपनी की संभावित लिस्टिंग और समूह की भविष्य की रणनीति को लेकर विभिन्न चर्चाएं चल रही हैं।
टाटा समूह के लिए क्यों अहम है LIC का निवेश?
LIC देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में शामिल है। इसलिए किसी बड़े कारोबारी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों में LIC की हिस्सेदारी में बदलाव को बाजार में निवेशकों की नजर से महत्वपूर्ण माना जाता है।
टाटा समूह की कंपनियों में LIC की बढ़ती हिस्सेदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब टाटा संस की भविष्य की संरचना और रणनीतिक दिशा को लेकर बाजार में चर्चा बनी हुई है। हालांकि, केवल हिस्सेदारी बढ़ने के आधार पर LIC के निवेश के पीछे किसी विशेष रणनीतिक उद्देश्य का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
जून 2022 के बाद बदला निवेश पैटर्न
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, जून 2022 के बाद टाटा समूह की 14 सूचीबद्ध कंपनियों में से 10 में LIC की हिस्सेदारी में वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों के शेयरों में कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
LIC का निवेश मुख्य रूप से एक दीर्घकालिक संस्थागत निवेशक के तौर पर देखा जाता है। इसलिए हिस्सेदारी में बदलाव को कंपनी के निवेश पोर्टफोलियो और बाजार मूल्यांकन के व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी कंपनी में LIC की हिस्सेदारी बढ़ने को निवेश की सलाह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।