Hazaribagh: विष्णुगढ़ प्रखंड के जोबर पंचायत अंतर्गत बंदखारो गांव निवासी एवं ओमान में कार्यरत प्रवासी मजदूर प्रदीप कुमार महतो की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के करीब पांच माह बाद उनके परिवार को न्याय मिला है. लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद मृतक के आश्रितों को 49 लाख 76 हजार रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया है. यह राशि उनकी पत्नी, माता-पिता और पुत्री के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित कर दी गई है. मुआवजा मिलने से शोकाकुल परिवार को आर्थिक राहत मिली है और भविष्य की चुनौतियों से लड़ने का एक मजबूत सहारा भी मिला है.
ओमान में सड़क हादसे में हुई थी मौत
जानकारी के अनुसार, प्रदीप कुमार महतो रोजगार के सिलसिले में ओमान में कार्यरत थे. 18 मार्च 2026 को इलाज कराने के बाद वह पैदल अपने श्रमिक शिविर लौट रहे थे. इसी दौरान सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. दुर्घटना इतनी भीषण थी कि उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई. इस हादसे ने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य छीन लिया, जिससे परिजनों के सामने आजीविका और भविष्य को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया.
लगातार प्रयास के बाद मिला मुआवजा
प्रवासी श्रमिकों के हितों के लिए कार्यरत समाजसेवी सिकंदर अली ने बताया कि दुर्घटना के बाद मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किए गए. जावावी पावरटेक इंजीनियरिंग कंपनी के प्रबंधन के साथ कई दौर की वार्ता और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कंपनी ने 40 लाख रुपये का मुआवजा देने पर सहमति जताई. इसके अलावा बीमा और अन्य वैधानिक देयों को जोड़कर कुल 49 लाख 76 हजार रुपये का मुआवजा मृतक के आश्रितों को उपलब्ध कराया गया.
परिजनों ने जताया आभार
मुआवजे की राशि मिलने के बाद मृतक के परिजनों ने जावावी पावरटेक इंजीनियरिंग कंपनी, समाजसेवी सिकंदर अली, महेंद्र महतो तथा पूरी प्रक्रिया में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया. परिजनों ने कहा कि प्रदीप कुमार महतो की कमी को कोई भी मुआवजा पूरा नहीं कर सकता, लेकिन यह राशि परिवार के भरण-पोषण, पुत्री की शिक्षा तथा भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहारा बनेगी.
प्रवासी श्रमिकों के लिए बनी मिसाल
स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले को प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण बताया. उनका कहना है कि विदेशों में कार्यरत श्रमिकों के साथ किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में यदि समय पर कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहल की जाए, तो पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है. प्रदीप कुमार महतो के परिवार को मिला यह मुआवजा केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि संगठित प्रयास, संवेदनशील पहल और निरंतर संघर्ष से प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को उनका अधिकार दिलाया जा सकता है. यह मामला अन्य प्रवासी श्रमिक परिवारों के लिए भी भरोसे, न्याय और उम्मीद की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आया है.